क्या ग्रीन टी पीना वाक़ई ख़तरनाक हो सकता है? - Indiarox
  • Home
  • Health
  • क्या ग्रीन टी पीना वाक़ई ख़तरनाक हो सकता है?
Health

क्या ग्रीन टी पीना वाक़ई ख़तरनाक हो सकता है?

Indiarox, India Rox

सेहत की चिंता बढ़ी और ‘ग्रीन-टी’ रिवॉल्यूशन आ गया.

जो लोग कुछ समय पहले तक कुल्हड़ में मलाई मारकर चाय पीते थे उन्होंने सेहत के नाम पर अपना स्वाद बदल लिया. चुस्कियों की जगह ‘सिप’ ने ली और ये सब हुआ, सिर्फ़ और सिर्फ़ सेहत के नाम पर.

ग्रीन टी के इतने फ़ायदे गिनाए गए कि लोगों ने इसे सेहतमंद रहने के लिए ज़रूरी समझ लिया और घरों में चीनी-दूध का आना कम हो गया. लेकिन अब सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता देवेकर के एक वीडियो ने सेहत के फ़िक्रमंद लोगों को असमंजस में डाल दिया है.

https://www.instagram.com/p/BqWKqaKg16F/?utm_source=ig_web_copy_link

करीना कपूर और आलिया भट्ट जैसी फिटनेस आइकन को सेहतमंद रखने वाली रुजुता का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में रुजुता कह रही हैं “ग्रीन टी उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो ग्रीन टी के बिज़नेस में हैं. बाकी आप लोगों के लिए, आप की सेहत के लिए, एंटी-ऑक्सीडेंट के लिए और आपकी ख़ूबसूरती के लिए कड़क-अदरक वाली चाय ही अच्छी है.”

रुजुता के इस वीडियो ने कुछ और किया हो या न किया हो, लेकिन लोगों को कन्फ़्यूज़ ज़रूर कर दिया है. अब कोई फ़िटनेस ट्रेनर ऐसा बोले तो डरना बनता है…वो भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि सेलीब्रिटीज़ को फ़िट रखने वाली न्यूट्रीशनिस्ट.

पर जिस चाय को दुनिया ‘दवा’ मानकर पीती है, वो ‘नुकसानदेह’ कैसे हो सकती है?

रुजुता का जो वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है, उसमें उन्होंने ऐसा कहने के पीछे कोई वजह नहीं बताई है. ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है. लेकिन अगर ग्रीन टी के इतिहास पर नज़र डालें तो ग्रीन टी का इतिहास पांच हज़ार साल पुराना है. चीन में इसका इस्तेमाल सबसे पुराना है.

ग्रीन टी

चाय चाहे कोई भी हो, वो ब्लैक टी हो, ग्रीन टी हो या कोई सी भी और वो कैमेलिया साइनेसिस पौधे से मिलती है. यह पौधा किस तरह के वातावरण में उगा है, पत्तियां किस तरह से चुनी गई हैं और फिर उन्होंने किस तरह से प्रोसेस किया गया है, इस पर ही चाय की किस्म निर्धारित होती है.

कैसे तैयार होती है ग्रीन टी?

अगर ग्रीन टी तैयार की जानी है तो इसे छाया में उगाना होगा. इसके ऊपर जाली लगानी होगी. ताकि सूरज की रोशनी कम होने पर इसकी पत्तियाँ ज़्यादा क्लोरोफिल पैदा करेंगी. सूरज की रौशनी कम होने पर चाय के पौधे में पॉलीफिनॉल नाम का केमिकल भी कम निकलता है, जिससे चाय में हल्का कसैला स्वाद आता है. वैसे कुछ लोगों को ये स्वाद ही पसंद आता है.

चाय की पत्तियां और कलियाँ तोड़कर पहले इन्हें सुखाया जाता है. इन्हें कितना सुखाया जाएगा, ये इस बात पर तय होता है कि किस तरह की चाय आपको चाहिए. ग्रीन टी बनानी है तो पत्तियों को सिर्फ़ एक दिन सुखाकर उन्हें भाप में पकाया जाता है.

अगर चाय की पत्ती को कुछ दिन सुखाकर उसे हल्का सा तोड़कर भाप में उबालकर ब्लैक टी तैयार होती है. यही चाय दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है. कुल चाय की खपत का 78 फ़ीसद ब्लैक टी होती है. इस चाय को काफ़ी दिनों तक सुखाया जाता है. फिर इसकी पत्तियाँ हल्की सी तोड़कर भाप में पकाई जाती हैं.

ग्रीन टी

ग्रीन टी के घटकों की बात करें तो इसमें 15 फ़ीसदी प्रोटीन, 4 फ़ीसदी अमीनो एसिड, 26 फ़ीसदी फ़ाइबर, 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 7 प्रतिशत लिपिड, 2 फीसदी पिग्मेंट्स, 5 प्रतिशत मिनरल्स, 30 फ़ीसदी फ़ेनोलिक कंपाउंड्स होते हैं. ये प्रतिशत ड्राई ग्रीन टी के हैं.

इन आंकड़ों को देखकर तो ये कह पाना मुश्किल है कि ग्रीन टी पीने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं लेकिन कुछ अध्ययन ऐसे भी हैं जिनमें ग्रीन टी से जुड़े होने वाले नुकसान भी बताए गए हैं. लेकिन ये नुकसान ग्रीन टी की मात्रा पर निर्भर करता है.

वेबमेड वेबसाइट के मुताबिक, ग्रीन टी का इस्तेमाल मुख्यतौर पर तो सुरक्षित ही होता है लेकिन कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें ग्रीन टी पीने से लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी हो गई. कुछ लोगों ने इसकी वजह से लीवर और किडनी से जुड़ी परेशानी की बात कही है.

वेबसाइट के मुताबिक़, ग्रीन टी का इस्तेमाल तभी नुकसानदेह होता है जब ये बहुत अधिक मात्रा में लिया जाता है और ये नुकसान इसमें मौजूद कैफ़ीन की वजह से होता है. इसकी वजह से सिरदर्द, नर्वसनेस, सोने में दिक़्क़त, उल्टी, डायरिया की शिकायत हो सकती है.

ग्रीन टी

जिन लोगों को एनीमिया की शिकायत है, उन्हें ग्रीन टी पीते समय ख़ास ख़्याल रखना चाहिए. इसके अलावा जिन लोगों को एंक्ज़ाइटी डिस्ऑर्डर हो, ब्लीडिंग डिस्ऑर्डर हो, दिल से जुड़ी परेशानी हो, डायबिटीज़ हो उन्हें ग्रीन टी बेहद संतुलित मात्रा में लेना चाहिए.

बीबीसी गुडफ़ूड के मुताबिक़, ग्रीन टी में कैफ़ीन होता है. हालांकि हर ब्रांड की ग्रीन टी में ये मात्रा अलग-अलग हो सकती है. फिर भी कॉफ़ी की तुलना में इसमें कैफ़ीन की मात्रा कम होती है. ग्रीन टी पीने वाले कुछ लोगों को लगता है कि इसे पीने से एनर्जी लेवल बढ़ता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है और मूड बेहतर होता है. लेकिन ज़रूरी नहीं है कि ये असर सबके लिए हो.

अगर आपका शरीर कैफ़ीन के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील है तो आपको सलाह दी जाती है कि ग्रीन टी का बेहद संतुलित इस्तेमाल करें. ज़्यादा ग्रीन टी पीने से नींद से जुड़ी परेशानी हो सकती है.

सभी दूसरी चायों की तरह इसमें भी टैनिन होता है. टैनिन शरीर में आयरन के अवशोषण को प्रभावित करता है. ऐसे में अगर आप कुछ ऐसा खा रहे हैं जिसमें आयरन की भरपूर मात्रा हो, तो उस दौरान ग्रीन टी नहीं पीने की सलाह दी जाती है.

जिम ग्रीन टी की गोलियां लिया करते थे. उन्होंने गोलियां ये सोचकर लेना शुरू की थीं कि इससे वो स्वस्थ रहेंगे लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनके डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनका लीवर ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा.

जिम उस दिन को याद करते हुए बताते हैं, “मेरी पत्नी ने मुझे देखते हुए पूछा कि क्या मैं ठीक हूं? मैंने जवाब दिया कि मैं पूरी तरह से ठीक हूं लेकिन उसने कहा कि मेरा चेहरा पीला नज़र आ रहा है. जब मैंने शीशे में अपना मुंह देखा तो मैं दंग रह गया.”

ग्रीन टी की गोलियां लेने की वजह से जिम का लीवर ख़राब हो गया था. मेडिकल रिपोर्ट पढ़कर ख़ुद जिम को भी इस बात पर यक़ीन नहीं हुआ.

For the latest news of the game, follow us on Facebook and Twitter on … and get updates for every game of cricket, football etc. 

Related posts

Eat Good Feel Good! These Foods Will Help You Fight Depression

spyrox

Amul is Making Camel Milk Chocolates, Know the Health Benefits & How is it Different From Cow Milk

spyrox

गन्‍ना कि‍सानों को मोदी सरकार ने दी बड़ी राहत, 8000 करोड़ का राहत पैकेज मंजूर

spyrox

Leave a Comment