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International Yoga Day 2018: जानिए योग से होने वाले लाभ

योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। योग स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है इसे रोज करने से कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाएगा। इस दिन के साथ ही आप भी अपने दैनिक कामों में योग को शामिल कर सकते है।

21 जून को पूरी दुनिया भर में मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाए जाने के पीछे कारण है कि  इस दिन ग्रीष्म संक्रांति होती है। इस दिन सूर्य धरती की दृष्टि से उत्तर से दक्षिण की ओर चलना शुरू करता है।  योग से कई बीमारियों से छुटकारा तो मिलता ही है साथ ही शरीर में ऊर्जा का प्रभावी संचार होता है। व्यायाम की तरह योग में भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। योग मुद्राएं यानी वह स्थिति जिसमें स्थिरता और सहजता दोनों होते हैं। योग करते समय यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं योग करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1.योग करने से पहले थोड़ी हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। एकदम सीधे व्यायाम नहीं करना चाहिए। एक्सपर्ट की मानें तो पहले शरीर को लचीला होने के बाद ही व्यायाम करना चाहिए।

2.सुबह शाम योग करना अच्छा रहता है लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खाना खाने के करीब 3 घंटे बाद योग करना चाहिए।

3.योग हमेसा योग एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें और हमेशा योग एक्सपर्ट के बता गए योग करें, क्योंकि गलत आसन करने से अपके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

4.कमर, गर्दन, सियाटिका दर्द से पीड़ितों को आगे झुकने वाले व्यायाम नहीं करने चाहिए। हृदय रोगी व गर्भवती महिलाओं को श्वास रोकने वाले आसन नहीं करने चाहिए।

5.अल्सर, हर्निया, दिल, बीपी के रोगी और गर्भवती महिलाओं को योगाभ्यास प्रशिक्षक के निरीक्षण में ही करना चाहिए।

आज हम आपको योग के 10 प्रमुख आसन बताने जा रहे हैं।

1. स्वस्तिकासन

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स्वस्तिकासन करने के लिए बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जांघ और पिंडली के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाए उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठें व रीढ़ सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें। इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।

इसे करने के लाभ

इसे करने से पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।
पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है।
यह आसन ध्यान करने के लिए बहुत अच्छा है।

2. गोमुखासन 

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दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को दाएं नितम्ब के पास रखें। दायें पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें की दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर हो जाएं। दायें हाथ को ऊपर उठाकर पीठ की ओर मुडिए तथा बाएं हाथ को पीठ के पीछे नीचे से लाकर दायें हाथ को पकड़िए। ध्यान रहे कि गर्दन और कमर सीधी रहे। एक ओ़र लगभग एक मिनट तक करने के बाद दूसरी ओ़र से इसी प्रकार करें।

इसे करने के लाभ

यह आसन धातुरोग, बहुमूत्र एवं स्त्री रोगों में लाभकारी है।
संधिवात, गाठिया रोग को दूर करता है।

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3. गोरक्षासन  

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दोनों पैरों की एडी व पंजे आपस में मिलाकर सामने रखिये।
अब सीवनी नाड़ी को एडियों पर रखते हुए उस पर बैठ जाइए। दोनों घुटने जमीन पर टिके हुए हों।
हाथों को ज्ञान मुद्रा की स्थिति में घुटनों पर रखें।

इसे करने के लाभ

मांसपेशियो में रक्त संचार ठीक रूप से होकर वे स्वस्थ होती है।
इन्द्रियों की चंचलता समाप्त कर मन में शांति प्रदान करता है।

4. अर्द्धमत्स्येन्द्रासन 

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दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर एडी को नितम्ब के पास लगाएं।
बाएं पैर को दायें पैर के घुटने के पास बाहर की ओ़र जमीन पर रखें।
बाएं हाथ को दायें घुटने के पास बाहर की ओ़र सीधा रखते हुए दायें पैर के पंजे को पकडें।
दायें हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर पीछे की ओ़र देखें।
इसी प्रकार दूसरी ओ़र से इस आसन को करें।

इसे करने के लाभ

डायबिटीज व कमरदर्द में लाभकारी है।
रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाता है।
पेट के जुड़ी परेशानियों को दूर करता है।

5. योगमुद्रासन

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बाएं पैर को उठाकर दायीं जांघ पर इस प्रकार लगाइए की बाएं पैर की एडी नाभि के नीचे आए।
दायें पैर को उठाकर इस तरह लाइए की बाएं पैर की एडी के साथ नाभि के नीचे मिल जाए।
दोनों हाथ पीछे ले जाकर बाएं हाथ की कलाई को दाहिने हाथ से पकड़े। फिर श्वास छोड़ते हुए।
सामने की ओ़र झुकते हुए नाक को जमीन से लगाने का प्रयास करें। हाथ बदलकर क्रिया करें।

इसे करने चेहरा सुन्दर, स्वभाव विनम्र व मन एकाग्र होता है।

6. शंखासन

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हाथों को घुटनों पर रखते हुए पंजों के बल बैठ जाइए। श्वास अंदर भरते हुए दायें घुटने को बाएं पैर के पंजे के पास टिकाइए व बाएं घुटने को दायीं तरफ झुकाइए।
गर्दन को बाईं ओ़र से पीछे की ओ़र घुमाइए व पीछे देखिये।
थोड़े समय रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए बीच में आ जाए। इसी प्रकार दूसरी ओ़र से करें,इसे करने से सभी प्रकार के पेट से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं।

7. सर्वांगासन  

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दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाकर 90 डिग्री का एंगल बनाएं। बाहों और कोहनियों की सहायता से शरीर के निचले भाग को इतना ऊपर ले जाएं की वह कन्धों पर सीधा खड़ा हो जाए।
पीठ को हाथों का सहारा दें।. हाथों के सहारे से पीठ को दबाए। फिर धीरे-धीरे
पहले पीठ को जमीन से टिकाएं फिर पैरों को भी धीरे-धीरे सीधा करें।

इसे करने से थायराइड में लाभ मिलता है।
मोटापा, दुर्बलता, थकान आदि की परेशानी दूर हो जाती हैं।

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