प्रधानमंत्री की रैली में भीड़ लाने के लिए जनता के पैसे क्यों खर्च किए जाएं?

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जयपुर के अमरूदों का बाग मैदान में 7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली है. इसकी तैयारियां जोरों पर हैं. इस जनसंवाद रैली को मोदी की ऑफिशियल रैली बताया गया है. इसमें मोदी 12 सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद करेंगे. वो खुद कन्फर्म करेंगे कि प्रधानमंत्री आवास, उज्जवला, मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, श्रमिक कार्ड, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य, मुख्यमंत्री जल स्वावलबंन, भामाशाह चिकित्सा योजना, स्कूटी वितरण लाभान्वित, पालनहार, तीर्थयात्रा और फसल ऋणमाफी समेत अन्य योजनाओं का लाभ लोगों को मिला है या नहीं.

अब रैली मोदी की है, तो भीड़ तो जुटानी ही होगी. इसके लिए जिला कलेक्टरों को आदेश दिए गए हैं. हर एक कलेक्टर को करीब 10,000 लोगों को रैली में लाने के लिए कहा गया है. भीड़ को रैली में लाने के लिए सरकारी पैसे से बसों का इंतजाम किया गया है. रैली में आने वाले लोगों के लिए अमरूदों वाले बाग में रहने, खाने-पीने के इंतजाम भी किए गए हैं. लेकिन इस रैली की तैयारियों और खर्चे को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

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जबरदस्ती का टारगेट क्यों?

स्थानीय मीडिया के मुताबिक सभी 33 जिला कलेक्टरों को निर्देश है कि वो अपने जिले से कम से कम 9300 लोगों को ज़रूर लेकर आएं. इसमें हर योजना के हिसाब से लाभ पाए लोगों की संख्या भी बताई गई है. कहा गया है कि पीएम आवास योजना और मुद्रा योजना के 4300 लाभार्थी, उज्ज्वला के 1500, श्रमिक कार्ड के 1500, पालनहार योजना के 1000, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य के 500, स्किल इंडिया के 300, सीएम जल स्वावलंबन के 300, भामाशाह स्वास्थ्य योजना के 250, स्कूटी वितरण के 200, तीर्थयात्रा और कृषि कर्जमाफी के 100-100 लाभार्थियों को हर जिले से लाने का टारगेट दिया गया है. इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टर पिछले 10 दिनों से तैयारियां कर रहे हैं. स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है जो लोगों के नाम लिखकर ला रहा हैं. फ्री में आना-जाना होगा, खाना भी मिलेगा और जयपुर भी घूमने को मिलेगा ऐसा कहकर भीड़ चलने के लिए तैयार की जा रही है.

जनसंवाद से पहले संवाद की तैयारियां क्यों?

प्रधानमंत्री से संवाद करने वाले लोगों के नाम पहले से तय कर लिए गए हैं. इन लोगों को अलग से ट्रेनिंग दी जा रही है कि प्रधानमंत्री के सामने कैसे बोलना है. राजस्थान के भरतपुर जिले में आईटी के डिप्टी डायरेक्टर सत्यनारायण चौहान ने कहा कि वहां पीएमओ और सीएमओ से आई एक टीम ने संवाद के लिए चुने गए लाभार्थियों को बोलने की प्राइमरी ट्रेनिंग दी. 5 जुलाई को इन्हें जयपुर भेज दिया गया है और वहां इन्हें आगे की ट्रेनिंग दी जाएगी जिससे पीएम के सवालों का अच्छे से जवाब दे सकें. तीन दिन ये लोग जयपुर ही रहेंगे.

सरकारी पैसे की फिजूलखर्ची क्यों?

पीएम की रैली के लिए अमरूदों का बाग में बड़ा टेंट लगा है. यहां पानी, खाने की व्यवस्था भी है. साथ में योजनाओं के हिसाब से अलग-अलग ब्लॉक बनाए हुए हैं.  5,579 बसों को किराए पर लिया गया है. इसके लिए 7.22 करोड़ रुपए का बजट दिया गया है. साथ ही हर बस पर कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है. कलेक्टरों को पूरी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं.

बसों के लिए रिलीज किए फंड का आदेश.

हमने जब इन सब सरकारी फरमानों की जानकारी लेने के लिए अलग-अलग जिलों के कलेक्टरों से फोन पर बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बात नहीं की. कई कलेक्टर साहब ने रैली का नाम सुनते ही फोन काट दिया तो किसी ने रैली के बाद बात करने को कहा. दूसरे अधिकारियों ने भी इस रैली पर टिप्पणी करने से मना कर दिया.

साथ ही रैली के आयोजकों को खासतौर पर निर्देश हैं कि रैली में आने वाले लोगों की ठीक तरह से तलाशी ली जाए जिससे झुंझुनू में हुई मोदी की रैली जैसा हंगामा न हो. बहरहाल, साल के अंत में यहां विधानसभा चुनाव होने हैं. नरेंद्र मोदी की पीएम बनने के बाद उनका यह पहला जयपुर दौरा है. ऐसे में इस ऑफिशियल रैली को बीजेपी का चुनाव के लिए शंखनाद माना जा रहा है.

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